मार्केट में डिजिटल डिवाइसेज बडती ही जा रही हैं और उनसे होने वाली इनकम भी. कुछ महीने पहले सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक ने इनस्टाग्राम को 50 अरब रुपयें में खरीदा। इनस्टाग्राम के इतनी कीमत में खरीदने की वजह थी कि इसने एप्पल के आई ओ एस ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक एप्लीकेशनडेवलप की जिससे यूजर फोटो खींचने के साथ डिजिटल फ़िल्टर का इस्तेमाल कर है और इन फोटो को कई सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर यूज किया जा सकता है. ऐसी बहुत सी एप डेवलप कंपनियां हैं जिन्होंने एप्स डेवलप करके खुद को साबित किया है. स्मार्ट फ़ोन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सभी
कंपनिया अपना कारोबार एप्स पर फोकस कर रहीं हैं, ताकि लोगों तक पहुँच आसानी से बनायीं जा सके। इस समय एप्पल के स्टोर पर 7.5 लाख से ज्यादा एप्स मोजूद हैं वही गूगल प्ले पर ये संख्या 10 लाख से भी ऊपर पहुँच चुकी है। स्मार्ट फ़ोन का सेल्फ ग्राफ बढ़ने के पीछे एप्स ही है।
पोसिबिलिटी
कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं तो इस फील्ड में असीम संभावनाएं हैं। आप में लोगों की जरूरतों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। एक यूजफुल एप्लीकेशन डेवलप क्रिएटिव माइंड होना जरूरी हैं। देखा जाये तो एप्स के डेवलपमेंट में कोइ कॉस्ट नहीं आती। एप्स को डेवलप करके आप उसे कंपनियों को बेच सकते हैं। या फिर स्टोर्स में रखकर सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं।
कंपनिया अपना कारोबार एप्स पर फोकस कर रहीं हैं, ताकि लोगों तक पहुँच आसानी से बनायीं जा सके। इस समय एप्पल के स्टोर पर 7.5 लाख से ज्यादा एप्स मोजूद हैं वही गूगल प्ले पर ये संख्या 10 लाख से भी ऊपर पहुँच चुकी है। स्मार्ट फ़ोन का सेल्फ ग्राफ बढ़ने के पीछे एप्स ही है।
पोसिबिलिटी
कंप्यूटर प्रोग्रामर हैं तो इस फील्ड में असीम संभावनाएं हैं। आप में लोगों की जरूरतों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। एक यूजफुल एप्लीकेशन डेवलप क्रिएटिव माइंड होना जरूरी हैं। देखा जाये तो एप्स के डेवलपमेंट में कोइ कॉस्ट नहीं आती। एप्स को डेवलप करके आप उसे कंपनियों को बेच सकते हैं। या फिर स्टोर्स में रखकर सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं।





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